बीकानेर में कांग्रेस की वापसी
बीकानेर में 12 साल बाद कांग्रेस ने निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि चूरू में भाजपा मजबूत रही। हनुमानगढ़ में निर्दलीयों और श्रीगंगानगर में बंटे हुए जनादेश ने दोनों प्रमुख दलों के सामने चुनौती...

निकाय चुनाव – बीकानेर संभाग
राकेश आचार्य,
वरिष्ठ पत्रकार
Table Of Content
- निकाय चुनाव – बीकानेर संभाग
- बीकानेर में भाजपा को बड़ा झटका
- 12 साल बाद कांग्रेस का महापौर
- बहुमत के बावजूद उपमहापौर भाजपा के खाते में
- कोर वोटर नहीं संभाल सकी भाजपा
- भाजपा के कई प्रमुख चेहरे हारे
- पालिकाओं में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर
- चूरू में भाजपा मजबूत
- हनुमानगढ़ में निर्दलीयों ने बिगाड़ा गणित
- श्रीगंगानगर में कांग्रेस आगे, लेकिन जनादेश बंटा
बीकानेर संभाग के निकाय चुनावों ने भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले की एकरूप तस्वीर पेश करने के बजाय अलग-अलग जिलों में अलग-अलग सियासी समीकरण सामने रखे हैं। बीकानेर में 12 साल बाद कांग्रेस ने निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल कर एक बार फिर से खुद को साबित करने का प्रयास किया है। वहीं चूरू जिले में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा। हनुमानगढ़ में निर्दलीय उम्मीदवारों ने दोनों प्रमुख दलों के सामने चुनौती खड़ी की, जबकि श्रीगंगानगर में भी कई निकायों में जनादेश बंटा हुआ नजर आया। कुल मिलाकर परिणाम बताते हैं कि शहरी निकाय चुनाव में दलों के पारंपरिक प्रभाव के साथ स्थानीय उम्मीदवार और स्थानीय समीकरण भी महत्वपूर्ण रहे।
बीकानेर में भाजपा को बड़ा झटका
जिले के निकाय चुनावों में इस बार भाजपा को बड़ा झटका लगा है। छह नगर पालिकाओं और एक निगम के चुनाव में बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं 12 साल बाद कांग्रेस निगम में अपना महापौर बनाने में सफल हुई, जबकि उपमहापौर का चुनाव भाजपा के पक्ष में गया। इस परिणाम ने दोनों दलों के सामने स्थानीय स्तर पर संगठन और राजनीतिक समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं।
12 साल बाद कांग्रेस का महापौर
बीकानेर नगर निगम में पिछले दो चुनावों से लगातार भाजपा का बोर्ड था और कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में थी। इस चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया। निगम में महापौर पद के लिए कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला उम्मीदवार थे, जबकि भाजपा ने डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस के 42 और भाजपा के 27 पार्षद निर्वाचित हुए। महापौर चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला को 50 वोट मिले, जबकि भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले।
बहुमत के बावजूद उपमहापौर भाजपा के खाते में
42 पार्षदों का बहुमत होने के बावजूद उपमहापौर के चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की प्रत्याशी नसीम बानो को 38 मत मिले, जबकि भाजपा के पंकज गहलोत को 40 मत मिले। भाजपा के पास 27 पार्षद थे, ऐसे में उसके प्रत्याशी को अपने संख्याबल से 13 अधिक मत मिले। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी को उसके 42 पार्षदों की संख्या से चार मत कम मिले। एक मत नोटा में गया और एक मत निरस्त हुआ। गुप्त मतदान होने के कारण अतिरिक्त मत किस खेमे से आए, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती। परिणाम ने बीकानेर निगम में दोनों दलों के बीच बने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को जरूर चर्चा में ला दिया।
कोर वोटर नहीं संभाल सकी भाजपा
निकाय चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन निगम क्षेत्र में कमजोर रहा। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने बीकानेर में रोड शो किया। इस चुनाव में कांग्रेस ने बीकानेर पश्चिम के 39 वार्डों में 23 और पूर्व के 41 वार्डों में 19 सीटें जीतीं। भाजपा को पश्चिम में 10 और पूर्व में 17 सीटें मिलीं। इन परिणामों से भाजपा के पारंपरिक मतों के बिखराव के संकेत मिले।
भाजपा के कई प्रमुख चेहरे हारे
इस निकाय चुनाव में भाजपा के कई प्रमुख चेहरे और महापौर पद के दावेदार माने जाने वाले उम्मीदवार भी चुनाव हार गए। वार्ड 73 से भाजपा के दीपक पारीक को कांग्रेस के अनिल कल्ला ने 800 से अधिक मतों से हराया। वार्ड 14 से पूर्व महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित भी करीब 400 मतों से चुनाव हार गईं। इसी तरह वार्ड 32 से भूपेंद्र शर्मा, वार्ड 62 से गोपाल अग्रवाल और वार्ड 28 से मधु सुराणा को भी हार का सामना करना पड़ा।
पालिकाओं में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर
जिले की छह नगर पालिकाओं के परिणाम में कांग्रेस को केवल देशनोक में स्पष्ट बहुमत मिला। देशनोक में कांग्रेस को 15, भाजपा को 7 और निर्दलीयों को 3 सीटें मिलीं। नोखा में माकपा समर्थित विकास मंच ने 29 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यहां भाजपा को 13 और निर्दलीयों को 3 सीटें मिलीं।
लूणकरणसर में भाजपा को 23, कांग्रेस को 11 और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। खाजूवाला में भाजपा को 11, कांग्रेस को 8 और एक सीट निर्दलीय को मिली। श्रीडूंगरगढ़ में कांग्रेस 15 सीटों के साथ सबसे आगे रही, जबकि भाजपा को 13, विकास मंच को 9, माकपा को एक और निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं। नापासर में भाजपा को 8, कांग्रेस को 7, निर्दलीयों को 6 और आरएलपी को 2 सीटें मिलीं, जबकि दो सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ। इन परिणामों से साफ है कि बीकानेर निगम में कांग्रेस की बड़ी जीत के बावजूद जिले की छोटी निकायों में भाजपा का प्रभाव बना रहा।
चूरू में भाजपा मजबूत
बीकानेर के मुकाबले चूरू जिले में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा। जिले के 11 निकायों के 430 वार्डों में भाजपा ने 186, कांग्रेस ने 161 और निर्दलीयों ने 81 सीटें जीतीं, जबकि दो सीटें आरएलपी के खाते में गईं।
चूरू नगर परिषद में भाजपा को 30, कांग्रेस को 24 और निर्दलीयों को 6 सीटें मिलीं। सुजानगढ़ में भाजपा ने 31 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया। सरदारशहर में भाजपा 25 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। रतनगढ़ में भाजपा को 21, तारानगर में 18 और बीदासर में 16 सीटें मिलीं। सादुलपुर में कांग्रेस 17 सीटों के साथ सबसे आगे रही और निर्दलीयों को 14 सीटें मिलीं। रतननगर में कांग्रेस को 14 और साहवा में 11 सीटें मिलीं। छापर में भाजपा को 12, कांग्रेस को 9 और निर्दलीयों को 4 सीटें मिलीं। राजलदेसर में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 14-14 सीटें मिलीं, जबकि आरएलपी को 2 और निर्दलीयों को 5 सीटें मिलीं।
हनुमानगढ़ में निर्दलीयों ने बिगाड़ा गणित
हनुमानगढ़ जिले में भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले निर्दलीय उम्मीदवार सबसे प्रभावी रहे। जिले के आठ निकायों के 290 वार्डों में निर्दलीयों ने 133 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 91, भाजपा के खाते में 64 और माकपा के खाते में 2 सीटें आईं।
हनुमानगढ़ नगर परिषद में ही निर्दलीयों ने 34 सीटें जीतकर दोनों प्रमुख दलों को पीछे छोड़ दिया। यहां भाजपा को 15 और कांग्रेस को 10 सीटें मिलीं। भादरा में 21 सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं। संगरिया में भी निर्दलीय सबसे आगे रहे, जबकि रावतसर में निर्दलीयों ने 18 सीटों के साथ बढ़त बनाई। नोहर में कांग्रेस ने 20 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बढ़त बनाई, लेकिन यहां भी 18 निर्दलीय पार्षद चुने गए। पीलीबंगा में भाजपा 18 सीटों के साथ सबसे आगे रही। टिब्बी में 11 निर्दलीय, 8 कांग्रेस और एक माकपा पार्षद चुना गया। गोलूवाला में भाजपा को 11, कांग्रेस को 10 और निर्दलीयों को 4 सीटें मिलीं। हनुमानगढ़ में परिणामों ने स्पष्ट किया कि स्थानीय उम्मीदवारों और समीकरणों का प्रभाव दोनों प्रमुख दलों के लिए चुनौती बना रहा।
श्रीगंगानगर में कांग्रेस आगे, लेकिन जनादेश बंटा
श्रीगंगानगर जिले के 11 निकायों में परिणाम मिश्रित रहे। श्रीगंगानगर नगर परिषद में भाजपा 30 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी, जबकि कांग्रेस को 17 और निर्दलीयों को 18 सीटें मिलीं। अनूपगढ़ में कांग्रेस ने 16, भाजपा ने 7 और निर्दलीयों ने 12 सीटें जीतीं। गजसिंहपुर में कांग्रेस 13 सीटों के साथ आगे रही, जबकि भाजपा को 6 और निर्दलीयों को एक सीट मिली। घड़साना में कांग्रेस को 16, भाजपा को 4 और निर्दलीयों को 5 सीटें मिलीं।
केसरीसिंहपुर में कांग्रेस ने 13, भाजपा ने 5 और निर्दलीयों ने 2 सीटें जीतीं। पदमपुर में भाजपा 13 सीटों के साथ आगे रही, जबकि कांग्रेस को 11 और निर्दलीयों को एक सीट मिली। श्रीकरणपुर में भाजपा ने 14 सीटों के साथ स्पष्ट बढ़त बनाई, कांग्रेस को 9 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं।
सादुलशहर में निर्दलीयों का दबदबा रहा। यहां 25 में से 22 सीटें निर्दलीयों ने जीतीं, जबकि भाजपा को 2 और कांग्रेस को एक सीट मिली। सूरतगढ़ में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 16-16 सीटें मिलीं, जबकि 12 सीटों पर निर्दलीय और एक सीट पर माकपा प्रत्याशी विजयी रहा। रायसिंहनगर में भाजपा को 13, कांग्रेस को 11 और निर्दलीयों को 11 सीटें मिलीं। श्रीविजयनगर में कांग्रेस 11 सीटों के साथ आगे रही, जबकि भाजपा को 10 और निर्दलीयों को 4 सीटें मिलीं।
इस तरह श्रीगंगानगर में किसी एक दल की एकतरफा तस्वीर सामने नहीं आई। कुछ निकायों में कांग्रेस मजबूत रही, कुछ में भाजपा आगे रही और कई जगह निर्दलीयों ने परिणाम का गणित बदल दिया। कुल मिलाकर बीकानेर संभाग के निकाय चुनावों का संदेश यही है कि शहरी राजनीति में पार्टी के साथ स्थानीय चेहरा, स्थानीय संगठन और वार्ड स्तर के समीकरण भी परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।






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