पानी पर सियासत, विरोध पर पहरा? लूणी के जल संकट से धारा 163 तक, जोधपुर में बढ़ा राजनीतिक तापमान
भीषण गर्मी में त्रस्त जनता, दावों के विज्ञापन और धारा 163 के साये में सुलगती सूर्य नगरी जोधपुर। भीषण गर्मी, पेयजल संकट, कलेक्ट्रेट पर जनता का प्रदर्शन, सरकार के दावों पर उठते सवाल और अब पूरे जोधपुर...

भीषण गर्मी में त्रस्त जनता, दावों के विज्ञापन और धारा 163 के साये में सुलगती सूर्य नगरी
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जोधपुर। भीषण गर्मी, पेयजल संकट, कलेक्ट्रेट पर जनता का प्रदर्शन, सरकार के दावों पर उठते सवाल और अब पूरे जोधपुर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में दो माह के लिए धारा 163 लागू। इन घटनाओं ने जोधपुर में पानी के मुद्दे को केवल जनसुविधा का विषय नहीं रहने दिया, बल्कि यह अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बनता जा रहा है।
पिछले दिनों लूणी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण बड़ी संख्या में जोधपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे और पेयजल संकट को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कई गांवों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही, टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है और भीषण गर्मी में लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस दिन कलेक्ट्रेट पर जल संकट को लेकर प्रदर्शन हो रहा था, उसी दिन राज्य मंत्री और लूणी विधायक जोगाराम पटेल की ओर से समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर यह संदेश दिया गया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति सुचारू है और किसी प्रकार की गंभीर समस्या नहीं है। इसके बाद से ही क्षेत्र में पानी की वास्तविक स्थिति को लेकर बहस तेज हो गई थी।
अब धारा 163 ने बढ़ाई चर्चा
इसी बीच जोधपुर पुलिस आयुक्तालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। आदेश के अनुसार यह निषेधाज्ञा 14 जून 2026 से 12 अगस्त 2026 तक अथवा अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।
प्रशासन का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। हालांकि विपक्ष इसे जनता की आवाज दबाने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
गहलोत का हमला: ‘जनता परेशान, सरकार विज्ञापनों में व्यस्त’
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी विस्तृत प्रतिक्रिया में आरोप लगाया कि जोधपुर के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
गहलोत ने कहा कि जोधपुर से केंद्र में मंत्री और राज्य सरकार में कानून मंत्री होने के बावजूद जिले की बिजली और पानी व्यवस्था चरमरा चुकी है। उनके अनुसार भीषण गर्मी में आमजन परेशान हैं, लेकिन समस्याओं के समाधान की बजाय प्रशासन धारा 163 लागू कर विरोध की आवाजों को सीमित करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समाचार पत्रों में सुचारू जलापूर्ति के दावे प्रकाशित किए जा रहे हैं। गहलोत के अनुसार धरातल और सरकारी दावों के बीच का यह अंतर ही जनता के आक्रोश का कारण बन रहा है।
राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना भी बनी विवाद का केंद्र
जल संकट के बीच गहलोत ने अपनी सरकार के समय शुरू की गई Rajiv Gandhi Lift Canal Project Phase-III को भी मुद्दा बनाया है।
उन्होंने दावा किया कि लगभग 1400 करोड़ रुपये की इस महत्वपूर्ण पेयजल परियोजना में से 1200 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, लेकिन परियोजना की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो रही। उनके अनुसार यह परियोजना मार्च 2025 तक पूरी होनी थी, किंतु अब विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों के चलते इसकी समयसीमा मार्च 2027 तक खिंचने की आशंका जताई जा रही है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि रूट परिवर्तन, वन स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर परियोजना को उलझाया गया है, जिससे जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों को मिलने वाली दीर्घकालिक राहत प्रभावित हो रही है।
असल सवाल: संकट है या केवल धारणा?
पूरे विवाद का केंद्र यही प्रश्न बन गया है कि आखिर लूणी और जोधपुर में पानी की वास्तविक स्थिति क्या है?
यदि क्षेत्र में जलापूर्ति पूरी तरह सुचारू है, तो फिर बड़ी संख्या में लोगों को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि जनता की शिकायतें वास्तविक हैं, तो फिर सरकारी दावों और विज्ञापनों में दिखाई जा रही तस्वीर अलग क्यों है?
यही विरोधाभास अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। एक तरफ सरकार विकास कार्यों और जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बताने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे जमीनी हकीकत से दूर प्रचार करार दे रहा है।
जनता को इंतजार समाधान का
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल उन हजारों लोगों का है जो गर्मी के इस दौर में नियमित पानी और बिजली की उपलब्धता चाहते हैं। धारा 163 लागू होने, विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक बयानों के बीच आम नागरिक की प्राथमिक चिंता अब भी वही है—क्या उसे समय पर पर्याप्त पानी मिलेगा?
जोधपुर में जल संकट, सरकारी दावों, विपक्ष के आरोपों और प्रशासनिक सख्ती के इस त्रिकोण ने आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया है। यदि स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं हुआ, तो पानी का यह सवाल केवल जनसुविधा नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक विमर्श का बड़ा केंद्र बन सकता है।






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