राजस्थान में पानी पर सियासत, आसमान से अनिश्चितता और ज़मीन पर बढ़ता संकट
इधर, जल संवेदकों ने 17 जून सुबह 10 बजे से पेयजल आपूर्ति कार्य बंद करने की चेतावनी दी जोधपुर। राजस्थान इस समय एक साथ कई मोर्चों पर जल संकट की चुनौती से जूझ रहा है। एक ओर प्रदेश के अनेक शहरों और कस्बों...

इधर, जल संवेदकों ने 17 जून सुबह 10 बजे से पेयजल आपूर्ति कार्य बंद करने की चेतावनी दी
जोधपुर। राजस्थान इस समय एक साथ कई मोर्चों पर जल संकट की चुनौती से जूझ रहा है। एक ओर प्रदेश के अनेक शहरों और कस्बों में पेयजल की कमी को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं, दूसरी ओर मानसून की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच पानी के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हालात को और गंभीर बनाते हुए राजस्थान के जलदाय विभाग से जुड़े जल संवेदकों ने 17 जून सुबह 10 बजे से पेयजल आपूर्ति कार्य बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे लाखों लोगों की जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
राजस्थान में पिछले कुछ सप्ताह से कई जिलों में पेयजल संकट को लेकर लोगों का आक्रोश सामने आ रहा है। गर्मी और जलस्रोतों पर बढ़ते दबाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक पानी की उपलब्धता बड़ा मुद्दा बन चुकी है। ऐसे समय में मानसून ही सबसे बड़ी उम्मीद माना जा रहा है, लेकिन मौसम विभाग के हालिया अनुमानों में देशभर में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई है। शुरुआती मानसूनी गतिविधियां भी अपेक्षा से कमजोर रही हैं और जून के पहले दस दिनों में देश में वर्षा सामान्य से काफी कम दर्ज की गई है।
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि मानसून राजस्थान में सामान्य समय के आसपास पहुंच सकता है, लेकिन वर्षा का वितरण असमान रहने की आशंका है। कुछ पूर्वानुमानों में राजस्थान के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना भी जताई गई है। ऐसे में जलाशयों, बांधों और पेयजल परियोजनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसी बीच पानी का मुद्दा राजनीतिक रंग भी ले चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार प्रदेश में पानी और जनसुविधाओं को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पलटवार करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर जल संसाधनों के प्रबंधन में विफल रहने का आरोप लगाया है। हाल ही में शेखावत ने कहा कि राजस्थान की जल समस्याओं और विशेषकर जोधपुर क्षेत्र की चुनौतियों के लिए पिछली सरकार की नीतियां जिम्मेदार रही हैं।
इन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच सबसे बड़ी चिंता जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर खड़ी हो गई है। राजस्थान के जल संवेदकों द्वारा प्रकाशित अपील के अनुसार, उनका दावा है कि पिछले 35 महीनों से भुगतान लंबित है। विज्ञापन में कहा गया है कि बार-बार वार्ता, धरना और समझौता पत्रों के बावजूद बकाया राशि का भुगतान नहीं हुआ। संवेदकों का कहना है कि कर्मचारियों का वेतन, मशीनों और वाहनों का संचालन तथा बैंक ऋणों का भुगतान प्रभावित हो रहा है, जिसके कारण उन्होंने 17 जून 2026 सुबह 10 बजे से पेयजल आपूर्ति कार्य बंद करने का निर्णय लिया है।
संवेदकों का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन बिना भुगतान के व्यवस्था चलाना अब संभव नहीं रह गया है। उनकी प्रमुख मांगों में लंबित भुगतान जारी करना, पूर्व समझौतों की पालना और जल जीवन मिशन व पेयजल योजनाओं के संचालन के लिए वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है।
यदि जल संवेदकों का यह आंदोलन लंबा खिंचता है तो पहले से जल संकट झेल रहे राजस्थान में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे समय में जब मानसून को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, सरकार, प्रशासन और संवेदकों के बीच शीघ्र समाधान निकालना आवश्यक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ा मुद्दा है, जिसके समाधान के लिए दीर्घकालिक जल प्रबंधन, समय पर भुगतान और प्रभावी प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता है।






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