हरित कौशल, नए करियर
दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से हरित हो रही है और इसका असर रोजगार पर भी दिख रहा है। हरित कौशल अब केवल पर्यावरण क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि वित्त, प्रबंधन, तकनीक और पारंपरिक पेशों की भी जरूरत बन रहे...

युवा एवं करियर
डॉ. त्रिलोक शर्मा,
करियर विश्लेषक
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कल्पना कीजिए, चार साल बाद दो विद्यार्थी एक ही डिग्री लेकर नौकरी की तलाश में निकलते हैं। दोनों को लेखांकन, वित्तीय विश्लेषण और एक्सेल का ज्ञान है। लेकिन एक विद्यार्थी को ईएसजी, कार्बन लेखांकन, सततता रिपोर्टिंग, जलवायु जोखिम और हरित वित्त की भी समझ है।
सवाल है, क्या दोनों के लिए रोजगार के अवसर एक जैसे होंगे? यह सवाल आने वाले रोजगार बाजार की बड़ी सच्चाई की ओर संकेत करता है। दुनिया की अर्थव्यवस्था अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल दिशा में बढ़ रही है और इसके साथ नौकरियों की प्रकृति भी बदल रही है। इसका अर्थ केवल सौर ऊर्जा अभियंताओं या पर्यावरण वैज्ञानिकों की मांग बढ़ना नहीं है। असली बदलाव यह है कि लगभग हर पेशे में नए हरित कौशल जुड़ रहे हैं।
हरित करियर का बदलता अर्थ
‘हरित करियर’ सुनते ही सौर ऊर्जा तकनीशियन, पर्यावरण वैज्ञानिक या वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञ की तस्वीर सामने आती है। लेकिन पारंपरिक नौकरियां भी अब ‘हरित’ होती जा रही हैं। एक लेखाकार को कार्बन उत्सर्जन की गणना और रिपोर्टिंग समझनी पड़ सकती है। बैंकिंग में किसी परियोजना से जुड़े जलवायु जोखिम का आकलन महत्वपूर्ण हो सकता है। निवेश विश्लेषक किसी कंपनी को उसके पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक प्रदर्शन के आधार पर भी देख सकता है।
यानी भविष्य का हरित करियर केवल पर्यावरण विज्ञान पढ़ने वालों के लिए नहीं है। वाणिज्य, प्रबंधन, अभियंत्रण, कानून, सूचना प्रौद्योगिकी, आंकड़ा विश्लेषण, विपणन और वित्त, हर क्षेत्र में हरित कौशल की भूमिका बढ़ रही है।
आंकड़े बदलाव की कहानी बताते हैं
लिंक्डइन की Global Green Skills Report 2025 के अनुसार, हरित कौशल की मांग उनकी उपलब्धता की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रही है। आधे से अधिक हरित नियुक्तियां ऐसी पारंपरिक भूमिकाओं में हो रही हैं, जिन्हें अब तक सीधे पर्यावरण से नहीं जोड़ा जाता था।
अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र 2024 में दुनिया भर में 1.66 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा था। भारत में भी तस्वीर तेजी से बदल रही है। स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स और सत्त्व कंसल्टिंग के अध्ययन में 2047 तक भारत में लगभग 3.5 करोड़ हरित रोजगारों की संभावना जताई गई है।
भारत में बढ़ते अवसर
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युत वाहन, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और ऊर्जा दक्षता से जुड़े क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ रही हैं। दिसंबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 513 गीगावाट से अधिक हो चुकी थी और गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 51.93 प्रतिशत पहुंच गई थी।
राजस्थान और गुजरात सौर ऊर्जा के प्रमुख केंद्रों के रूप में उभरे हैं। तमिलनाडु पवन ऊर्जा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजस्थान का भड़ला, मध्य प्रदेश का रीवा और गुजरात का कच्छ उस आर्थिक बदलाव के प्रतीक हैं जिसमें ऊर्जा, तकनीक, वित्त, आंकड़े और मानव संसाधन एक साथ जुड़ते हैं। एक बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र को इंजीनियरों के साथ वित्त विशेषज्ञ, आंकड़ा विश्लेषक और अन्य पेशेवर भी चाहिए होते हैं।
डिग्री के साथ जोड़ें हरित कौशल
वाणिज्य या प्रबंधन पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपनी पूरी पढ़ाई बदलने की जरूरत नहीं है। उन्हें मौजूदा शिक्षा में एक नई परत जोड़नी है। ईएसजी विश्लेषण, सततता रिपोर्टिंग, कार्बन लेखांकन, हरित वित्त, जलवायु जोखिम और सतत खरीद जैसे क्षेत्र नए अवसर खोल सकते हैं।
सरल सूत्र में ऐसे समझा जा सकता है:
डिग्री + हरित ज्ञान + डिजिटल कौशल + काम का प्रमाण = हरित करियर की तैयारी
केवल प्रमाण-पत्रों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि विद्यार्थी ने क्या सीखा और उसे कहां इस्तेमाल किया।
शुरुआत आज से
हरित करियर की तैयारी के लिए चार साल का इंतजार जरूरी नहीं है। अगले 30 दिन भी शुरुआत के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। पहले सप्ताह में ईएसजी, कार्बन, सतत विकास लक्ष्य और चक्रीय अर्थव्यवस्था समझें। दूसरे सप्ताह में किसी कंपनी की सततता रिपोर्ट पढ़ें। तीसरे सप्ताह में आईएफआरएस एस1 और एस2 जैसे मानकों की जानकारी लें। चौथे सप्ताह में सीखी बातों के आधार पर दो-तीन पृष्ठ का छोटा सततता विश्लेषण तैयार करें।
तीस दिनों में कोई विशेषज्ञ नहीं बनेगा, लेकिन ‘हरित करियर के बारे में सुना है’ से आगे बढ़कर ‘मैंने इसकी तैयारी शुरू कर दी है’ तक जरूर पहुंचा जा सकता है।
विद्यार्थी अक्सर पूछते हैं कि चार साल बाद सबसे अच्छा करियर कौन-सा होगा। इसका निश्चित उत्तर किसी के पास नहीं है। जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, पानी, कचरा, संसाधन दक्षता, कार्बन उत्सर्जन, आपूर्ति शृंखला, जोखिम प्रबंधन और सतत विकास ऐसी ही चुनौतियां हैं। इनसे जुड़े कामों में अलग-अलग विषयों की विशेषज्ञता की जरूरत होगी।
आज के विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ‘कल की महत्वपूर्ण समस्याओं को हल करने के लिए मैं आज कौन-सी क्षमताएं विकसित कर सकता हूं?’ भविष्य की नौकरी का इंतजार करने की बजाय भविष्य की जरूरतों के लिए खुद को तैयार करना ही आज के विद्यार्थी की सबसे उपयोगी तैयारी हो सकती है।






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